नवाबी अब नहीं लेकिन

1-
नवाबी अब नहीं लेकिन
नवाबोँ की तरह उनके,
तेवर बदलते हैं कि
हुक्का फिर तवे का।

2-
तबाही में कारणों को
नवज्जो न दे ‘मुकेश’
जिन्दगी तलाश
तदवीर के लिए।

3-
मैं गमोँ पे क्या लिखूं
कौन सी गजल,
लाखों हथौड़े बज गए
तब भी कहा हुजूर।

4-
क्योंकर कहूँ कि मिल गया
हमको खरीददार,
गुफ्तगू में जब कोई
थाम ले जिगर।

5-
उठाई जब नजर मैंने
खुदा ने तब कहा मुझसे
कागजों की नाव से
नीचे उतरके चल।

6-
गर यही है तेरी जन्नत तो
कह दे अपने खुदा से,
मैं मगर मायूस होकर
जी नहीं सकता।

7-
समझ में किस तरह आए
पढ़कर किताब को आखिर,
खामोश टूटी कुर्सियां ओ
संसद का जबाब?

8-
मैं नहीं इस मुल्क का
हर शख्स आदम है,
बनकर ज़नाज़ा बारूद का
इम्तिहां लेता।

9-
बदलूं गर खयाल तो
किस खयाल से बदलूं,
चारा-ए-गमे-उल्फत तुझे
किस हाल से बदलूं?

10-
हुआ गर आदमी मुस्तैद
अपनी अदालत में,
दुश्मन कमां का तीर तब
कैसे छोड़ेंगे?

11-
भेजिए लानत या
दीजिए गाली,
किसको खुदा कहें गर
देख लेवें हुस्न।

12-
मत पूछ चाँद का
निकलना उनसे,
इश्क के इजहार पे
उनको हँसी आई।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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