!! बारिश !!

झुलसी शाम, स्याह रातें
सहमी, दम तोरती जज्बातें !
बढ़ते भूख की दहक,
बढ़ते प्यास की तड़प !
बूँद बूँद की तरस,
साँसों पर न अब उसका वश !
आसमान ही उसका छत,
माँ के आँचल में लिपट,
उम्मीद के तकिये पर,
माथे को टिका कर,
घूरता वो गगन को !
मूँदती आँखों में दफन,
स्वर्ग सा हसीन स्वप्न !
बादलों के ऊँचे स्वर,
बरस पड़ने को बेसबर !
बूँद बूँद की भनक
झूमते पेड़ों की महक,
मस्त पंछियों की चहक !
ह्रदय में ज्वलित एक ललक,
बरस जा तू बादल इस कदर,
न रहे कोई दहक,
न रहे कोई कसक !!

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