गुरु वंदन

युग बदल जाएगा
सोच बदल जाएगी
बदल जाएँगे मेल मिलाप के तरीके
हाँ हम सब बदल रहे हैं
बदल जाएँगे पूरे के पूरे
शब्द बदल जाएँगे
भाव बदल जाएँगे
परिधान तो बदलते ही हैं
शरीर और आत्मा भी बदल जाएगी
संभव है धरती आकाश दरिया समंदर
सबका रंग बदले
या बदल जाएँ पूरे
पर ये आप मैं और हमसब जानते हैं
बदलाव के शाश्वत नियम को
नकारते हुए नहीं बदलेगी माँ
नहीं बदलेगी उसकी कालजयी ममता
नहीं बदलेगा बच्चा
और उसमे बैठा ईश्वर
नहीं बदलेगा निर्माण का नियम
नहीं बदलेगा मनुष्य की धमनियों में दौड़ता
सीखने और सिखाने का नियम
सच मानिये
नहीं बदलेगा जिज्ञासु शिष्य
नहीं बदलेगा
मोमबत्ती की तरह जलता पिघलता
अंधरे को मिटाता
ज्ञान का परचम लहराता
तुम्हारा मेरा
हम सबका शिक्षक।

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