सोचा मैं भी जन्मदिवस मनाऊं||

आश्विन कृष्ण त्रयोदशी के दिन
नवरात्रा से तीन दिवस पहले |
श्वेत धवल वस्त्रयुत हो
सोचा मैं भी जन्मदिवस मनाऊं||

मित्र किसी ने पूछा मुझसे
दिवस तो ऐसा हो जो सबको|
प्यारा लगे और याद रहे
रक्खो फरवरी या सितम्बर ||
जो पंडिताऊ से दूर रहे

केक वेक लाओ, काटो फिर उसको
याद रहे दिन नहीं, वो निशा रहे |
पार्टी सार्टी साथ करेंगे
पैग वेग भी कुछ साथ रहे ||

तन्मयता से सुनकर बातें
बोलूं क्या कुछ समझा नहीं |
बोला भाई मेरे सुन मिथिला मे
पूजा होती बस संस्कृति की||

तात मात से आशीष लेकर
गुरुजन का संबल पाकर |
अध्यवसाय मे सतत युक्त हो
अब सोचा मैं जन्मदिवस मनाऊं||

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