नेता

नेता

खुश हैं मित्र
चकित भी,
कैसा एक नेता दमखम वाला निकला,
देश के उत्थान के लिए,
वह लड़ेगा,
देश बढ़ेगा,
क्योंकि लड़ाइयों से ही बढ़े हैं देश
उन्हें मिला है सबक इतिहास का।

नेता की श्वेत केशराशि
मानो धनराशि देश की
श्वेत, वैध, विधि सम्मत,
नेता के भाषणों में
संचित प्रतिभा और ओज
बढ़ा विश्वास, झुकेगा जनमत।

नेता के कथनों से
चुनते हैं माणिक मोती
उनके नयनों में
जलती है ज्योति,
अब नहीं जरूरत शिक्षा और ज्ञान की,
थी जरूरत देश को
एक दमदार नेता के आह्वान की।

जो देश बढ़े सदियों के श्रम से
वे तो थे भ्रम में,
गढ़ लेते ऐसा एक नेता
क्यों ढोते गदहे सा बोझा
प्रगति तरण में ले जाता उनको
नेता अपनी नाव से।

खुश हैं मित्र
चकित हैं
कैसे जग यह जान न पाया,
वाणी का यह ओज,
घटाये सकल सृष्टि का बोझ,
अगर है बढ़ना,
मत दूर देश जाने, कुछ पाने के
झंझट में पड़ना।

उनको है अफसोस
मनुज ने इतना दुख क्यों झेला,
पढ़ने लिखने, श्रम करने,
खोजाखाजी में खपने से
अच्छा था अगर उन्हें मिल जाता
ऐसा जैसा नेता अपना,
पर उनका प्रमुदित मन जान रहा है
सबका ऐसा कब कब भाग रहा है,
जल्द हमारा देश बहुत आगे बढ़ जायेगा
तुंग हिमालय की चोटी पर चढ़ जायेगा।