युद्ध वीर-3

उठो उठो बीरो चीरो अरिन-करेजन कौ,
पीरो मुख परे बनी बात हूँ बिगरिहै।
छटकि छटकि छाती छगुनी करैयन को,
कौन आज उछरि उछरि कै कचरिहै।।
‘हरिऔैध’ कहै बीर -बृंद ना अबेर करौ,
हाँक ते तिहारी धीर हूँ ना धीर धरिहै।
पाराधार-धार मैं उड़ैगी छार आँख लगे,
ठोकर की मार ते पहार गिरि परिहै।।

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  1. manoj charan Manoj Charan 28/07/2014

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