नींद

नींद उस बच्चे की
जिसे परियाँ खिला रहीं हैं
मुस्कान उसके चेहरे पर
सुबह के क्षितिज की तरह फैली हुई

नींद उस किशोर की
जिसकी प्रेमिका सपने में भी नहीं आती
हर सपने में वह साक्षात्कार देता
और असफल लौटता घर

नींद उस नौजवान की
जिसकी आँखों में करवट बदल रही है
एक सूखती हुई नदी
बिवाई की तरह फटे खेतों में
वह रातभर
हल जोतता रहता है

नींद उस युवती की
जिसके अन्दर
सपनों का समुन्द्र पछाड़ खा रहा है
लहरें लगातार शर्मिन्दा हो रही हैं

नींद उस बूढ़े की
जिसकी आँखों में
एक भूतहा खण्डहर बचा है
खण्डहर की ईंटों की रखवाली में
वह रातभर खाँसता रहता है
किसी भूत के अट्टाहास की तरह

किसिम-किसिम की होती है नींद
हर नींद के बाद जागना होता है
जिस नींद के बाद
जागने की गुँजाईश नहीं होती है
वह मौत होती है।

Leave a Reply