में एक किताब हूँ

में एक किताब हूँ,
हर किसी के सवालो का जवाब हूँ,
बोलो क्या जानना चाहते हो तुम,
तुम्हारे हर सवाल का जवाब है मेरे पास,
हिम्मत हो तो सुन कर देखो,
छुपे है मुझमे ऐसे गहरे राज़,
ज्ञान का भंड़ार हूँ में
जीवन का श्रृंगार हूँ में
गौर कीजिये, ज्ञान देने वाला और मन से उसे लेने वाला,
दोनों ही सामान होते हैं,
पर जीवन में इस ज्ञान को जो उतार कर चले वास्तव में,
वही महान होते हैं,
इसलिए मुझमे अपनी रूची बढ़ाओ,
इस ज्ञान के अनुभव से इस सृष्टि को रचाओ,
अच्छा क्या होता बुरा किसे कहते हैं सब समझ जाओगे तुम,
और मुश्किलो का सामना कैसे करना चाहिए सब सीख जाओगे तुम,
ज्ञान से भड़कर नहीं है कोई परिधान
कितना भी सजा लो इस माटी के पुतले को,
सब समझ आ जाएगा त्यागो गे जब प्राण

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