इत्मीनान से जीना किसे कहते हैं

इत्मीनान से जीना किसे कहते हैं,
पत्ते पानी में गिर कर क्यों बहते हैं,
हवा अपनी मर्ज़ी से क्यों चलती है,
रात के अँधेरे में तारे हमसे क्या कहते हैं,
क्यों वर्षा ना होने पर किसान रोता है,
और अधिक हो जाने पर सब कुछ खोता है,
क्यों ग्रहण के दिन आसमाँ झुक जाता है,
दिन के उजाले में चाँद के आगे सर झुकाता है,
हम जानते है की समय किसी के लिए नहीं रुकता,
फिर भी भगवान पर विश्वास रखने में हमारा दिल नहीं ठुकता,
रेत हमारी मुट्ठी में क्यों नहीं रूकती,
अपनी इच्छा से क्यों मिलती नहीं मुक्ति,
धरती के हिलने से भूकम्प है आ जाता,
कर्मो की गठरी को क्यों हम अपनी मर्ज़ी से पलट नहीं सकते,
एक मरे हुए इंसान को फिर ज़िंदा नहीं कर सकते,
जब ये सब हमारे हाथ में है नहीं,
तोह क्यों हमे जो मिल रहा है,
हम उसमे संतुष्ट नहीं.

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