तुम चाहो तो

तुम चाहो तो
मंजिल मेरी दूर हटा दो
मैं जाऊँ जिस ओर पथिक बन
उस पथ पर तुम शू ल बिछा दो
और सफर का क्लेश बढाने
गर्म सुलगती रेत बिछा दो

उफ् न करूँगा, कुछ न कहूँगा
गर तुम मेरे साथ रहो तो।

तुम चाहो तो
तट को मुझसे दूर हटा दो
और नाव को जर्जर करने
लहरों में तूफान जगा दो
ओर छोर ही ना हो जिसका
सागर को उतना फैला दो

उफ् न करूँगा, कुछ न कहूँगा
गर तुम मेरे साथ रहो तो।

तुम चाहो तो
पल पल पीडा क्लेश बढा दो
सुख की घडियाँ क्षीण बनाकर
दुख को मेरा मीत बना दो
साँसों की झुरमुट के भीतर
आहों का अम्बार लगा दो

उफ् न करूँगा, कुछ न कहूँगा
गर तुम मेरे साथ रहो तो।

तुम चाहो तो
जीवन मेरा व्यर्थ बना दो
आशा के सब दीप बुझाकर
घर्म कर्म का अर्थ मिटा दो
विकट विकराल समस्याओं से
मेरे जीवन को उलझा दो

उफ् न करूँगा, कुछ न कहूँगा
गर तुम मेरे साथ रहो तो।

तुम चाहो तो
मेरे काँधों बोझ बढ़ा दो
मेरे तन मन की ठठरी पर
अभिलाषा की अर्थी लिटा दो
चिता जलाकर मेरी इच्छा
चुन चुन कर सब भस्म बना दो

उफ् न करूँगा, कुछ न कहूँगा
गर तुम मेरे साथ रहो तो।

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