“वह’ कहाँ गया”

जो कहता कहने दो?
समय ढ़लता ढ़लने दो।
जो खुद पहचान न पाई।
को घोर नरक में जाई॥
साईं – साईं को करे।
साईं हृदय में होय॥
हृदय की टाठी खोल,
‘वह’ हृदय में होय॥
जैसे जो कहता कहने दो?
समय ढ़लता ढ़लने दो॥
सद् विचार रखो भाई।
मंगल’ॐ’कैसी लराई॥
+ + +
वेद पुरान पढ़ा नहीं।
मुक्ति कैसे होय॥
मुक्ति कैसे होय?
बन वन खोजत॥
स्व स्वयं को जान!
तू खुद को पहचान॥
खुद को जो जाना।
संत वही बखाना॥
सद् विचार रखो भाई।
मंगलॐ ઽकैसी लराई॥
जो खुद पहचान न पाई।
को घोर नरक में जाई॥
+ + +
शास्त्र वेद पढ़े बिनु।
खुद में જ્ઞાन बखाना॥
खुद में જ્ઞાन बखाना।
पास पड़ोस ना जाना॥
दूजे को करे बुराई।
का मंगल गई चतुराई॥
धर्म सभी मार्ग सिखाते।
संत रह आ कह जाते॥
अपने को पहचान भाई।
खुद को पहचान न पाई।
सद् विचार रखो भाई।
मंगल’ॐ’ઽ कैसी लराई॥

Leave a Reply