“काँग्रेश-लोकदल”

कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥ राजीव जी कह गये कुछ बात। मूल तक पहुचता पैसा पाँच॥ आर के धवन रहे समझाते। राजीव जी मानजा मेरी बात॥ सुनेगा देश सारा तुम्हारी बात। पायलटी अब छोड़ो देश चलाओ? जब देश को जुआ तेरा दरकार। देश में उठ चुकी अब आवाज॥ नव जवानों की है दरकार। राजीव-राजीव की हो सरकार॥ कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥ + + + लतर अंगूर की छाया निर्मल। याद दिलाता’मंगल’को बार बार॥ समझाने की याद जब आती। दिल गदगद बढ़ जाता प्यार॥ गजरा ले वह कौन खड़ी थी। शक्ती को अर्पपण करने वाली? एक पैर पर खड़ा उसे देखकर। विधायक शेर विधायक चौके॥ हार नौलखा सी माला कर। दस जनपथ में लिया प्यार॥ कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥

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आगे पहुँचा तो होता भाषण। बसंत साठे जी बोलता पाया॥ वी पी जी का नम्बर आया। दક્ષિण का जो बोल सुनाया॥ हिंदी का पेटारा लेकर आया। मुख्यमंत्री जी ने गोल लगाया॥ जब,तब अंग्रेजी में बोल उठाया। मुख्य मंत्री ने सबको समझाया॥ कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥

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उस बैठक की रोचक कहानी। घड़ी करती अपनी मनमानी॥ वह देख सभी रह गये दंग। रहा वहाँ अपना सबकुछ ढ़ंग॥ पास जो होता रहा दल गठन। नव लोकदल का हुआ सृजन॥ कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥

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वहाँ देखने का था मौका पाया। थी शेरबहादुर जी की सारी माया॥ आजमगढ़ का वह विधायक आया। था अतरौलिया जो नाम बढ़ाया॥ गया पहुच श्यामलाल जी के पास। स्पीकर डि0 जी रहे हमारे साथ॥ कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥

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अपने बंगले पर घंटों ઽ घुमाया। राम रहारी करके मन बहलाया॥ चौधरी जी, अपनी माया फैलाया। लोकदल बन गया हमें सुनाया॥ पं0 पतिराज ने साथ में लाया। काम था उनका दिल्ली घुमाया॥ कलयुग था वह शक्ति थी साथ। नाम था उसका चलता राज॥

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