चाँद

चाँद
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छिप जाता है जब जब सूरज
तब रोशन हो जाता चाँद।

मधुर चांदनी की शीतलता
धरती पर फैलाता चाँद ।

बचपन में बालक को ये
मामा बन बहलाता चाँद ।

उम्र बढ़े फिर ख्वाब दिखाता
अक्सर नींद उड़ाता चाँद ।

साजन की सूरत भी इसमे
सजनी की झलक दिखाता चाँद ।

परदेशों में रहने वालों को
वतन की याद दिलाता चाँद ।

शिव के माथे पर हो शोभित
देव तुल्य बन जाता चाँद ।

ईद मिलन की खुशियां देता
रोज़े मुकम्मल करता चाँद ।

-सुरेश जादव

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