“दिन-रात्रि रहें कैसे”

रघुनाथ रहो तू साथ हमारे।
हृदय में तेरा वास रहे
माँ पर नित आस रहे
माँ का नित साथ रहे।
रघुनाथ रहो तू साथ हमारे।
दरख्त सभी रहे गृह में
रघुनाथ रहो तू साथ हमारे।
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सूर्य शौर्य लिए लालिमा
भजन यजन नित होता हो।
नियम बद्ध हम रहें सदा
रिद्धि- सिद्धि नित साथ रहे।
भोले मेरे पास सदा
रघुनाथ रहो तू साथ हमारे।
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पवन पुष्प संग-संग बहे
चिड़िया चह-चह करें सदा
किलकारी करतल ध्वनि हो
नन्हें बच्चे साथ सदा।
हनुमत रક્ષા करें सदा
‘मंगल’ रघुनाथ के साथ रहो॥

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