“सरस्वती वन्दना”

वीणावादिनी बुद्धि की दाता

वीणावादिनी,स्वरदायिनी माँ।
नारायणी स्वर दो॥
सिद्धिदायिनी वीणाधारिणी

कर करतब करि कारिणी माँ।
स्वरदायिनी स्वर दो॥
ब्रह्माणी,कल्याणी पूजनी

दिन रात सदा मनभावनी माँ।
वीणावादिनी स्वर दो॥
जय-जय-जय माँ दाता

जय-जय-जय जयकारिणी।
वीणा वादिनी स्वर दो॥
जिह्वा पर नित वास करो

हिय में माँ उल्लास भरो।
वीणावादिनी स्वर दो॥
परमारथ हो हृदय में माँ

मेरा निर्मल मन कर दो।
वीणावादिनी स्वर दो॥
काया कल्प करो तन का

पल प्रति पल तू वर दो।
वीणावादिनी स्वर दो॥
करुणा तेज भरो मन में

सागर सा वाणी मन दो।
वीणावादिनी स्वर दो॥

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  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 26/10/2016

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