मेरे मुक्तक

तू अगर है तो वज़ूद,
दिखाता क्यों नही ।
मासूमों को हैवानो से,
बचाता क्यों नही ।
दुष्कर्म कर पेड़ों पर,
लटका देते है जो ।
ऐसे दरिंदो को नपुंसक,
बनाता क्यों नही ।

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दुष्कर्मो के खिलाफ कोई भी नेता बोलता क्यों नही।
चुनाव प्रचार मे बकने वाला जुबां खोलता क्यों नही।
अगर इंसान हैं तो फिर यूपी की दरिन्दगियों पर,
उन सबका खून जरा सा भी खौलता क्यों नही।

(सुरेश जादव)

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