“प्रीति होता मितवा”


रे नृत्य होता रहा मितवा।
वह सोहर होता रहा मितवा॥

उस दौर में यह यकी मानो।
न छलका मदिरालयमितवा॥

नव गीत होता रहा मितवा।
वह प्रीत होता रहा मितवा॥

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