यादें -कवि विनय भारत

जो तेरी एक झलक देखी

तो मन खुशियों से झूम गया

मनो कोई डूबते प्राणी को

सागर में कोई सहारा हो

तेरी यादों में रो रोकर

जो पन्ने हमने लिख डाले

मेरे जीवन की ये यादें

जो तू पढ़ती तो तू रोती

विनय भारत

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