कहानी कहना चाहता हूँ

कहानी कहना चाहता हूँ ।
बिखरे हुए कांच की दबी हुई आवाज की कहानी…
ढलती काली रात मेँ उस जिगर फाड़ती चीख की
मख्खी को उड़ाते उन डगमगाते हाथोँ की कहानी…
टूटी सड़क पे चलते पैरोँ सी आवाज की ठण्डी बर्फ के धुएँ सी साँस की
कहानी..
जवाब माँगते सवालोँ की
मौत माँगते जीवन की पश्चाताप की आग की कहानी …
फिनाइल से धुलते कपड़ोँ की
डेटॉल मिलाए पानी की
मनाही देते हाथोँ की कहानी..
मिन्नतेँ माँगती आँखोँ की
फेरी लगवाते पहियोँ की
निरुत्तर हुए भगवानोँ की
कहानी…
सलाहेँ देते लोगोँ की कन्नी काटते स्वजनोँ की
हैरान तीमारदारोँ की कहानी…
उसके घर मेँ आने की इनके बाहर जाने की उसके कुछ कहना चाहने की
इनके न सुनना चाहने की
कहानी…
किसी एक के हँसना चाहने की
तो किसी के रोना चाहने की
किसी के भागना चाहने की तो
किसी के रहना चाहने की
कहानी..
दीवार पे लगी खरोँचो की
अँगुलियोँ मेँ पड़े उन घावोँ की
पट्टी बँधवाते फोड़ोँ की
कहानी …
पीले पीले दाँतोँ की राम निकले हाथोँ की जो उखड़ गये उन बालोँ की
कहानी…
पिचके हुए गालोँ की पंसलियोँ के ढाँचोँ की टूटे हुए कुल्होँ की
कहानी …
मुँह से गिरती रोटी की होठोँ से लटकती लार की आँखो से टपकते पानी मेँ बहते गंगाधार की
कहानी..
कुछ भी न कर पाने की
टकटकी लगाते रहने की
कुछ हाथोँ से छुट जाने सुनसान एक तहखाने की …कहानी..
उनके खुश हो जाने की उसके कहीँ पे जाने की
जहाँ सब जाते वहाँ जाने की
फिर उनके खालीपन की
कहानी..
कुछ अनचाहे अहसासोँ की
कुछ अनजानी सी राहोँ की
कुछ अपनी ही कमजोरी की
कहानी…
कुछ घासतेल और तिली की
कुछ कुआँ नदी और फँदे की
कभी सीढी से गिर जाने की
कहानी..
रामायण पढ़ती औरत की
गीता मेँ खोते बालक की
भूमि पर चलते मानव की
कहानी..
मरते बच्चे के सदमे की
जीते बेटे की आहट की
नन्ही बच्ची की रोटी की
कहानी..
भयभीत सी कातर नजरोँ की
भावोँ को छुपाते अधरोँ की
सच्चाई कहते मुखड़ोँ की
कहानी…
मगरुर हुए सम्बन्धोँ की
मानव सुलभ सी गलति की
फिर पछताते रह जाने की
कहानी…
कभी मन मे रह चुके सपनोँ की
कभी मुँह को फुलाते अपनोँ की
कहीँ दीवाली के दीयोँ की
कहीँ दिल ही जलते रहने की
कहानी..
कभी बातेँ मीठी करने की
कभी ख्वाबोँ मेँ बह जाने की
कभी दो टुक भी कह जाने की
फिर अपनी पर आ जाने की
कहानी..
कोशिशोँ की नाकामी की
उफ्फ करते निश्वासोँ की
अँदरुनी धिक्कारोँ की कहानी..
इक क्षण मे जोश भरने की
दूजे मे होश खोने की इक क्षण मे पास आने दूजे मे दूर जाने की कहानी..
आजाद गगन के पंछी की
इक गगन ढूँढते रहने की
धरती से उखड़े पेड़ की जड़ के पानी चाहने की
अधपक्की दो रोटी की कुछ दूध मिले पानी की
धूँए से धुलती आँखोँ की
कहानी..
झील के ठहरे पानी की एक घने वीराने की
ट्री ट्री करती रात की कहानी..