अलविदा दामिनी (POEM NO. 26)

R A T H O R E saab

आज चली गई एक और बेटी

नाम उसका हे दामिनी

सारे अरमानो का गला गोट दिया

दामिनी ने तो अपना सब कुछ खो दिया

कितनी बेरहम थी उसकी मोत

सुनकर उसकी वो बाते आ जाये मोत

ना उसको इंसाफ मिला

मिल गई उसे तो मोत

आज हर बेटी घर से निकलने से डरती हे

आज हर बेटी अपनी जिन्दगी जीने से डरती हे

जो लगाम हो वो सब बेटी पे

बेटे जो करे वो सब सही हे धरती पे

ना करो इतना जुल्म-ए -इंसानों

ना करो पावन धरती माँ को गंधा

कभी कोख में तो कभी रोड पर फेकी जाती हे बेटिया

मत करो अब ये पाप

मत लो बेटी के श्राप

बेटी बचालो साथियो

बेटी बचालो साथियो

लेखक :-चन्दन राठौड़

समय :- 02:36 PM

दिंनाक :-29/12/012

Leave a Reply