“बादल उस ओर गये”।

बूँद-बूँद को तरस रहे हम,
बादल उस ओर गये।
आन के पेड़ वही फिर भी,
बादल उस ओर गये।
सपनों के खेगोश है भूखे’
बादल उस ओर गये। ,
घास डालता कौन इन्हें जब,
बादल उस ओर गये।
सूखे दिनों की आशंका ले,
बादल उस ओर गये।
मेघों की घनघोर छाया पर,
बादल उस ओर गये।
बूँद-बूँद को तरसा कर जब,
बादल उस ओर गये।
शब्दार्थ:-आशंका-आशा,इच्छा,कामना,संदेह,शक,आदर, सत्कार।
ओर-दिशा,पક્ષ । बादल-पृथवी के जल से उड़ी भाप–।

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