प्रधानमंत्री कोई भी हो ..

प्रधानमंत्री कोई भी हो ..

वो न सुनता है और न बोलता है..
जनता आजाद है ..उसे चुनती है..
वो गुलाम है उनका..
जिनके पैसों से वो चुनाव लड़ता है..

प्रधानमंत्री कोई भी हो ..

वो न सुनता है और न बोलता है..
जिनके हवाई जहाज़ों और हेलीकाप्टरों में बैठकर..
प्रचार के लिए वो पूरे देश में घूमता है..
चुनाव के बाद वे उसे दोनों हाथ और दोनों पाँव पर खड़ा करके..
उसके नथुने में नकेल कसकर..
जोत लेते हैं अपने विकास रथ में..

प्रधानमंत्री कोई भी हो..

वो न सुनता है और न बोलता है..
उसका काम नौटंकी की नचनिया सा है..
जो अपने नृत्य से मोह लेती है दर्शकों को..
लेकिन घर भरती है अपने मालिक का..

प्रधानमंत्री कोई भी हो..

वो न सुनता है और न बोलता है..
उसे दोनों कनपटियों पर पट्टे बंधे पहाडी घोड़े की तरह..
चलना पड़ता है उसी रास्ते पर..
जिस पर उसे उसके मालिक चलाते हैं..
जो उनकी सोच में विकास का रास्ता है..

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