हास्य कविता – पत्नी पर बातचीत कवि विनय भारत

एक राह में चलते चलते

एक मीत मिला

मैंने कहा वर्खुद्दार
कहा जा रहे हो दौडे दौड़े

वो बोल्या
गुरूजी

भैंस खो गयी है म्हारी

मैंने कहा भाई

हमारी
तो घर पे
रोटी बना रही है

कवी विनय भारत