“समर्पण”

हे माँ! तुझे मेरा तन समर्पित।
धन समर्पित, पुनि क्या क्या बचा॥
गान समर्पित मेरा प्राण समर्पित।
चाहता! चाँद तारे कर दूँ समर्पित॥
सूर्य! अंगारे घोड़े शेर हाथी लाकर।
पेड़ पौधा फूल माला प्रकृति समर्पित॥
पક્ષ में कृष्ण पક્ષव शुक्ल पક્ષ लाकर।
हीरा मोती उजाला लाकर करूँ समर्पित॥
पृथवी ईश्वर गणेश दाँत शुक्शराचार्य का नेत्र,
विद्या राम कर्म लोक ताप दोष ॠण काल,
बल रात्रि बेद वर्ण दिशा धाम सेना वायु,
पाँच छ: सात आठ नौ दस ग्यारह वारह’
चौदह पन्द्रह सोलह श्रृंगार ला करूँ समर्पित॥
अट्ठारहो पुराण सत्ताइसो नક્ષत्र मैं लाकर,
तैतिस कोट देवता सातो स्वर करूँ समर्पित॥
मातु मेरी केवल सादर विनती तुझसे,
जो भी माँ चाहो मैं करूँ समर्पित॥
चाहता मैं कुछ और कुछ और करूँ समर्पित।
जिससे संवर जाय निखरजाय मेरी यह जिंदगी॥(सन्1992 की रचना)

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