“मयखाना”

मयखाना दूर से भी,
देखा न था,
जब कभी।
जब वहां पहुचा,
चारो तरफ देखा,
अंधेरा सा छा गया।
ढूढ़ने लगा प्रकाश,
टूटा अंधेरा तो,
सवेरा हो गया।
मयखाना दूर——॥

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