“प्रेयसी”

बिनु प्रेयसी जिन्दगी,
मानो सेमल का फूल।
जैसे-तैसे कटती,
कटा खीरा तरबूज।
खीरा तो भी हीरा,
हरितमा` कायम रहती।
तरबूजे की लालिमा,
कभी ना गायब होती॥

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