गजल (वक्त और हिसाब)

गजल(वक्त और हिसाब)

वक्त भी कितना लाजवाब होता हैं .।।
किसी का दर्द तो किसी का ख्वाब होता हैं .।

लाख गुनाहों से कर ले कोई पर्दा यहाँ ।।
इक न इक दिन वह बेनकाब होता ।।

अमन किसे मिलता हैं छीनकर गैरो की खुशियाँ ।।
जब अपने ही दिल से जबाब होता है ।।

तखलीफ़ तो होती ही है प्यार में ऐ दोस्त ।।
मौसम तो हर वक्त लाजवाब होता हैं ।।

फिक्र मतकर उनकी बेवफाई की ऐ दोस्त ।।
वक्त आने पर पल पल का हिसाब होता हैं ।।

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