जीवन चक्र – कवि -विनय भारत

देखा हैं मैंने

एक बीज को वृक्ष बनते हुए

फिर पतझड़ में
झडते हुए

जामी में दबते हुए

एक नया बीज बनाने को

हाँ यही है
इस संसार का

जीवन चक्र

कवि विनय भारत