काव्य -” मेरा प्यार” कवि- विनय भारत

प्यार है वो
पूजा है वो
मान है वो
मेरी
जान है वो
रेगिस्तान में
अमृत पान है वो
वो दुख में
जीवन धारा है
सुख में
प्रेम का प्याला है
है वो
घर
जो हर मौसम के
अनुकूल होता है
वही तो
मेरा यार है
जो दुख में
मेरे साथ रोता है
है वो साथी
जो मुझे
हँसाता है
वही तो है
जो
मेरी कविताओं
को गाता है
वो है तो मैं
हूँ

हाँ
वही
तो
है
सिर्फ
मेरा और सिर्फ मेरा

सच्चा प्यार

कवि विनय ‘भारत’
copyright applied