गजल- भला कैसे हो

भला कैसे हो हम इँसानोँ का
जब खूनो से हाथ रँगाया है!
वफा का रँग जचा न मोहब्बत को
बेवफा का कलर अपनाया है!
वो रिश्ते टूट चुके हैँ
जो मुझे बेगाना बनाया है!
हम वो शक्स हैँ मेहरबानोँ
जो सबको हँसना सिखाया है!

रमाकाँत यादव 8756146096