आईने में तेरे झलकता हुँ

मैं वो रंग हुँ जो तेरी मस्ती में खिलता हुँ
मैं वो नूर हुँ जो करके दीद तेरे चमकता हुँ !
अरे मुझको इधर उधर कि बन्दिशों में मत तलाश “असरार”
मैं तो वो ही हुँ जो आईने में तेरे झलकता हुँ..

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