डर तो लगता है तुझे भी मेरी बेरुखी से….

डर तो लगता है तुझे भी मेरी बेरुखी से….
जो तु आज कल मुझपे इतना महरबान है!!

कंही हो ना जाए ये आँखे गम…
कंही हो ना जाये ये साँसे सुन्न..
मेने तो बहुत किया है इंतज़ार तेरा, अब तु भी मेरी सुन..
ये मुझपे असर नहीं तेरा..
तेरी बेरुखी का आलम है….
डर तो लगता है……………..
जो तु आज कल…………….

आगाह किया था मेने तो तुझे मेरे दिल के तुफानो से..
अब ये सजा है तेरी अब तु भी मेरे ख्वाबो को बुन..
नहीं बदली अभी भी ये नजर..
बदल गये है कुछ नजारें….
इतने दिन देखा है मेने तुझे…
अब तु भी अपनी आँखों में मुझको बुन.
डर तो लगता है……………..
जो तु आज कल…………….

नहीं कहता अब कि कुछ में…
मगर एक दिन तेरे नयन तरसेंगे..
तुझे होगा इंतज़ार मेरा..
और मैं पानी बनके ढल जाऊंगा !!

Leave a Reply