कुछ इस तरह ज़िन्दगी रुकने लगी है हर पल

कुछ इस तरह ज़िन्दगी रुकने लगी है हर पल
हर जगह ढूंढते रहते हैं घर का पता शामो-सहर !

कुछ मैं कहूँ कुछ तुम कहो ज़िन्दगी के ख़्वाब बुनो
थोड़ा हँसकर थोड़ा रो कर मैं चलूँ कुछ तुम चलो
पलकों के साये को हमेशा न देना अश्कों का ज़हर
कुछ इस तरह ज़िन्दगी रुकने लगी है हर पल !

ज़िन्दगी का ये किस्सा है सबसे जुदा हर हिस्सा
कभी गौर से पढ़ना याद आएगा कोई तो हादसा
याद आएगी पुरानी हवेली और बचपन का सफर
कुछ इस तरह ज़िन्दगी रुकने लगी है हर पल !

ऐ सूरज की किरणें ज़रा बता मेरा यार कहाँ है?
देख लेना ढूंढ लेना फिर बताना तू जाता जहां है
कभी मुझसे बिछड़े हुये साथी याद आते हैं अक्सर
कुछ इस तरह ज़िन्दगी रुकने लगी है हर पल !

प्यार की वो पुरानी बातें भी मुझे याद है अब तक
याद है तुम्हारा वादा तुम मिलोगे आख़िर कब तक ?
मेरे पास अब तक तुम नहीं आए जा रहे हो किधर ?
कुछ इस तरह ज़िन्दगी रुकने लगी है हर पल ॥

जैन अंशु डी० आँसू