हसीनोँ का रोजगार

अगर हमको उनसे मोहब्बत न हुयी होती,
तो आँखो मेँ उनके आने का इँतजार न होता!
हम कभी न बसाते उन्हेँ अपने दिल मेँ, गर उन पर ऐतबार न होता!
लोग कैसे कहते की मै एक आशिक हूँ,
गर उन पर जाँ -निसार न होता!
“रमाकाँत” हमेँ मिलती न कभी अपने प्यार मेँ बेवफाई ,
गर प्यार हसीनोँ का रोजगार न होता!