गजल – अँधेरा कितना भी होगा

अँधेरा कितना भी होगा तुम्हारे दिल मेँ
सब मिट जायेगा,
सिर्फ एक प्यार का दीप जलाकर देखो!
रिश्ता खुद-ब-खुद बन जायेगा
सिर्फ एकबार दिल लगाकर देखो!
गैरोँ की तरह हम मतलबपरस्त नहीँ हैँ
चाहे जब आजमा कर देखो!
आप अपनी मदभरी आँखो से
लोगो को मदहोश बनाते है,
और हम अपनी गजलोँ से;
गर विश्वास नहीँ तो गुनगुनाकर देखो!