गज़ल(वक्त)

।। वक्त।।

ठहर जा ! ए मेरे दोस्त बेमतलब की बात न कर ।।
वक्त तो बिल्कुल नही है, वक्त के बर्बाद न कर ।।1।।

कर ले कुछ एहसान खुद पर वक्त न जाये चला ।।
इस तरह गैरों के खातिर, मुफ़्त मे फरियाद न कर ।।2।।

न मिलेंगी मौत से मोहलत तुम्हें भी एक पल की ।।
आने वाले उन गमो का प्यार मे अनुवाद न कर ।।3।।

फिर नसीहत न मिलेगी ,न कोई अपना कहेगा ।।
न रहेगा वक्त तेरा, बेवजह विवाद न कर ।।4।।

खुदगर्ज इन रहगुजर से हमदिली की बात फिर क्यो।।
जो गये ठुकरा दिल को,अब उन्हें तू याद न कर ।।5।।

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