गजल- जमीँ आसमाँ का सफर

बेवफाओँ की गलियोँ मेँ आशिक रह चुके हैँ हम!
कोई पानी पर चलकर करतब दिखाता है तो क्या हुआ,
सदियोँ से अँगारोँ पर चल चुके हैँ हम!
आज तक दुनिया मेँ आशिक हुये लाखोँ,
पर कोई न हमारे जैसा;
आपकी यादोँ मेँ शायर बन चुकेँ हैँ हम!
कब से हमेँ इँतजार था आपके आने का,
पर आप नहीँ आये;
देखो! आपके ही खातिर जमीँ आसमाँ का सफर तय कर चुके हैँ हम!