अधूरे रिश्ते

हर किसी के साथ,
जुडा है नाता ।
चाहे वो दोस्त हो या अजनबी,
हमे वो रिश्ते जरूर कुछ-न-कुछ है सिखाता ।

रिश्तो मे आती है डरारे हजार,
फिर भी उन्हे निभाते है हम ।
एक साथ पूरी जिन्दगी,
बिताने की खाते है कसम ।

कुछ रिश्ते अटूट है,
कुछ रिश्ते कमजोर,
कुछ रिश्ते अनमोल है,
कुछ रिश्ते कठोर ।

रिश्ता जो एक बार टूटा,
तो दे देता है घम ।
दोबारा गलती न दौहराने के लिये,
हम उठाते है सम्भल-सम्भल कर कदम ।

कभी-कभी,
एक रिश्ता निभाते-निभाते,
हम एक दूसरे रिश्तो को,
है भूल जाते ।

अधूरे रिश्ते बन जाते है वो,
जिनका कोइ अर्थ नही ।
ऐसे रिश्ते कौन निभाता है?
जहा दोस्ती की एह्मियत ही नही?

2 Comments

  1. निशान्त पन्त "निशु" निशान्त पन्त "निशु" 14/03/2015
  2. Gaurav Bharam 29/07/2015

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