मोहब्बत का दर्द

वह मौसम ही क्या जिसमेँ
सर्द न हो,
दिल तो आज तक बहुत देखे
रमाकाँत ने;
पर वह दिल ही क्या जिसमेँ
मोहब्बत का दर्द न हो!