लडकियों की” हैलो- हाय” कवि विनय भारत

एक को लाइन मारे
दूजे को सताय
तीजे को तडफाय
चौंथे को फसाय

पांचवे के साथ मंदिर जाके
छठे के साथ फेरे ले जाए

ऐसी ही होती है लडकियों की

है लो – हाय

कवि विनय *
भारत*

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