बूढ़े का वेलेंटाइन -कवि -विनय भारत

एक बूढ़ा देख एक हसीना को बोला यूँ

नीली आँखों वाली कभी इश्क तो लडाइये

तुम्हारी अदाओं का मैं दीवाना सा बन गया हूँ
आकर के कभी हमसे नैन तो मिलाइये

बोली हसीना देख हड्डियों के ढांचे को

नसों में गुल्कोज की बोतल चढवाइये
और

फोड़ नहीं सकते जो चना कभी दाँतों से
फिर

अखरोट फोडने की बात ना चलाइये

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