एक रेल में – कवि – विनय भारत

रेल में वे बोले

स्फूर्ति और रफ्तार शरीर में जगाइये

हमारी वस्तु लीजिए और थकान मिटाइये

भरी भीड़ में अलग चमकेंगे आप

ऐसा जोश पाइये

मैंने कहा –

नहीं मिला परिणाम तो क्या पैसे लौटाइये ?

वे बोले-

जरूर मिलेगा

पहले ये जमालघोटा की
गोलियाँ तो खाइये!

विनय भारत