राही

अगर मगर ना कर राही।
डगर डगर पर चल राही॥
मान लो इस बात को सत।
बना लो इसे जीवन का व्रत॥
अब भी अगर समझ के नही।
तब जाओ भटक है यह सही॥
मन में रख लो यह ठान ।
कमाना है मूझे यहां नाम॥
तुम जाओ पहुंच भविश्य तक।
क्या थे, क्या हो आज तक॥
*******

Leave a Reply