मन

मन होता है बड़ा जटिल ।
रहती है इसमे ढेरो उलझनो सटिल॥
उम्र के शुरु होने से ढलने तक।
खत्म न होने वाली मकड़ जाल तक॥
मनो उलझन तलाशना बड़ा जटिल ।
तलाश कै बाहर निकालन और हठिल ॥
करे जो विश्लेषन संयमपूर्वक विचार का।
हो जीत आत्मविश्वास मनोविकार का॥
एकाग्रता पर संयमपुर्वक काबु है जिसका।
सहज और पारदर्शि जीवन है उसका॥

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