बेरोज़गार

गर्मियों के दोपहरों को
सहते हुए
जिंदगी की तपिश को
कहते हुए
खबरों के दरवाज़े से
होते हुए
ये दिन
जिंदगी में
पीड़ा के दिन हैं।

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