आत्म-मंथन

हर सफलता और सुख
चाहता है नीज कीमत ।
बिन चुकाए किमत प्राप्त सफलता
चोरी धन की तरह नही फलित ॥
कर तु आत्म-मंथन,
आत्मरूची और क्षमता सीज।
कर उस पहचान को ,
अनुकूल लक्ष्य के नीज॥
पूरे परिश्रम और लगन से‌,
प्राप्ती हेतू जुट जा आधार की।
जब राह पर आए बाधा,
विवेक से ले तु बिचार की॥
भय , चिंता और तनाव,
नही है समस्या का समाधान।
ले अपने महापुरुष कि
जीवन पोथी से परम ज्ञान॥
आत्म- विश्वास और साहस
व्यक्ती की पूंजी सबसे बड़ी।
सयंमित दिनचर्या अपना कर
हटा समस्या जो आगे खड़ी॥
धन और वैभव तुम्हारे
सुख का प्रमाण नही॥
परआत्मा सर्वशक्तिमान है
उन्ही का सच्चा ज्ञान सही॥
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