नसीहत

तेरी आँखो मेँ हर लम्हा
मेरे ख्वाबोँ का डेरा हो!
जब-जब भी आँखे खुले मेरी
सामने तेरा चेहरा हो!
जिँदगी मेँ बहुत चल चुके हम
अँधेरी राहोँ मेँ,
अब कोई राह ऐसी भी चुनो
जिसमेँ कहीँ तो सबेरा हो!
तुम शौक से रचाओ अपने हाथोँ मेँ
गैरो के नाम की मेँहदी
बस मेरी एक नसीहत याद रखना,
जब होने लगे बँद मेरी आँखे
तेरे हाँथो मे हाथ मेरा हो!

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