विदेशी सत्ता ऐ भारत

जो भी आया गले लगाया ।
उन्हे पचा के अपना अंग बनाया ।।
वोही निकले रे शैतान ।
उन्होने ली हमारी जान ।।
कब से कर रहे वो इंतजार ।
माँ के घर में दिखाया किरदार ।।
अनुठी सन्कृति है भारत माँ के नायक की ।
आते है यहाँ विदेशी खलनायक ।।
ओर बन जाते है बलनायक ।।।
भारतवर्ष मे आयी थी जाती बहुत ।
कभी तुर्क कभी मुगल कभी अंग्रेज यहाँ ।।
मुगल राजा हुये थे यहाँ ।
बाबर हुमायूँ अकबर यहाँ ।।
सभी ने हुकुमत अपनी अपनी चलाई ।
किसी ने ताज किसी ने किला सब ने इमारत बनाई ।।
और यहाँ आये थे धोखे बाज ।
जिन्होने ईस्ट इण्डिया से किया था राज ।।
आज पता नही कहाँ उजङ गये वे लोग ।
जो भारत वर्ष उजाङन आये थे ।।
वो स्वयं भस्म हो गये हिन्दु धर्म की आंधी से ।
जिन्होने नया धर्म चलाया अपनी राजी से ।।
वो हिन्दू धर्म मिटा ना सके ।
अपने सपने साकार कर ना सके ।
अरे वही हिन्दुस्थान है ।
जो हजारो साल पहले था ।।
अरे कहां गया वो अकबर अल्ला ।
जिसने दीन-ए-इलाही धर्म चलाया था ।।
विदेशी निती से बचना रे भारत माँ के वीरो ।
सभी ने सोने की चिङिया लूटी है ।।
अब मत करना विश्वास उनकी नीति झूटी है ।।
“जय हिन्द”

लेखक – शिव प्रकाश मीणा
रैणी-अलवर
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