खोया खोया-सा

खोया खोया-सा रहता हूॅं अक्‍सर तेरे ही ख्‍खालों में
उलझ जाता हूॅं मैं अक्‍सर तेरे सवालों में
लडखडाते हुए कदमों को सभाॅंलकर जैसे ही उठने की कोशिश करता हूॅं
फिर डूब जाता हूॅं अक्‍सर तेरी इन आॅंखों के प्‍यालों में