“आशीर्वाद गीत”

कोहबर आनन्द-आनन्द सारी दुनियाँ जी,
पापा के चरन छू के चढ़ि जा बाबू डोली जी।
मम्मी के आशिस लेकर चढ़ि जा बाबू डिली जी।
कोहबर आनन्द-आनन्द सारी दुनियाँ जी॥
चाचा केच रन छू के चढ़ि जा बाबू डोली जी।
चाची के चरन छू के चढ़ि जा बाबू डोली जी।
कोहबर आनन्द-आनन्द सारी दुनियाँ जी॥
बुआ के आशिस लेकर चढ़ि जा बाबू डिली जी।
कोहबर आनन्द-आनन्द सारी दुनियाँ जी॥
शव्दार्थ:-आशिस-आसीस,आशीर्वाद,दुआ। कोहबर- वह स्थान या घर जहाँ विवाह के समय कुल देवता स्थापित किए जाते हैं।
डोली-एक प्रकार की सवारी जिसे कहार कंधों पर लेकर चलते कैं।
नोट-शादी हेतु दूल्हा घर से निकलते समय का गीत।

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